21/09/2017

Hindi Quizzes for IBPS RRB 2017

IBPS RRB 2017 के लिए हिंदी प्रश्नोत्तरी 

प्रिय पाठकों !!



IBPS RRB की अधिसूचना जारी की जा चुकी है. ऐसे में आपकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए हम आपके लिए हिंदी की प्रश्नोतरी लाये है. आपनी तैयारी को तेज करते हुए अपनी सफलता सुनिश्चित कीजिये...

निर्देश(1-5) नीचे दिए गए गद्यांश के आधार पर पांच प्रश्न दिए गए है. गद्यांश का अध्ययन कीजिये और प्रश्न का उत्तर दीजिये.

श्रेष्ठ विचार मानवमात्र की थाती है. धर्म, जाति, भाषा आदि विभेदों का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. श्रेष्ठ सार्वकालिक और सार्वदेशिक होता है. श्रेष्ठ विचारों में सबके कल्याण की भावना होती है. सभी महापुरूषों के विचार मानव कल्याण के निमित्त ही होते हैं. वे एक-दूसरे के विरोधी नहीं, पूरक होते हैं. सभी श्रेष्ठ विचारधाराओं से सारतत्त्व ग्रहण कर मानव अपने जीवन को आनन्दमय और सुखमय बना सकता है. और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है. विवेकशील मनुष्य समन्वयकारी दृष्टिकोण अपनाकर सर्वजन्यहिताय की बात सोचता है. मानव आज मानवीय गुणों से दूर होता जा रहा है. वह विचारों की संकीर्णताओं में उलझ गया है. वह भूल रहा है कि मानव धर्म ही सर्वश्रेष्ठ धर्म है. स्वार्थ के वशीभूत होकर मानव हर बात को अपने मनोनुकूल देखना चाहता है. अन्य लोगों को उससे क्या असुविधाएँ, कष्ट होते हैं, इसकी उस लेशमात्र चिंता नहीं होती. अपने धन के बल से असमर्थ इंसानों के श्रम को खरीदा जाता है और उनके साथ अमानवीय व्यवहार करके मानव धर्म को ताक पर रखा जाता है. मानव धर्म तो कहता है कि अपराधियों के साथ भी दयाभुक्त और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिए. इससे उनकी अपराध-प्रवृति रचनात्मक कार्यों की ओर उन्मुख होगी. 


1. श्रेष्ठ विचार वे हैं जो 
(a) परस्पर विरोधी होते हैं
(b) सर्वजनहिताय के भाव को अभिव्यक्ति देते हैं 
(c) मानवमात्र के धर्म, जाति, भाषा आदि पर विचार करते हैं
(d) सभी धर्मों के सभी महापुरूषों द्वारा मान्य होते हैं
(e) इनमें से कोई नहीं

2. मानव प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है 
(a) विवेकशीलता को अपनाकर 
(b) मानवता विरोधी प्रवृत्तियों का विनाश करके 
(c) अपने जीवन को आनन्दमय और सुखमय बनाकर 
(d) सभी श्रेष्ठ विचारधाराओं का सारतत्व ग्रहण कर
(e) इनमें से कोई नहीं 

3. आज का मानव मानवीय गुणों से दूर होता जा रहा है। इसका प्रमाण यह है कि वह 
(a) लोकहित पर स्वहित को वरीयता दे रहा है 
(b) धर्मानुसार आचरण भूलता जा रहा है  
(c) विचारों की संकीर्णताओं को महत्त्वपूर्ण मानता है 
(d) अन्य लोगों के अहित का चिन्तन करता रहता है
(e) इनमें से कोई नहीं 

4. ‘मानव धर्म’ से लेखक का तात्पर्य है 
(a) ‘धन के बदले काम’ का विरोध करना 
(b) आर्थिक दृष्टि से असमर्थ इंसानों से श्रम न कराना  
(c) समाज में लोगों को सुख-सुविधाएं प्रदान करना 
(d) स्वहित को सर्वापरि न मानकर अन्य लोगों के कष्ट की भी परवाह करना
(e) इनमें से कोई नहीं 

5. मानवधर्म में अपराधियों को भी 
(a) समाज का प्रमुख अंग मानना चाहिए 
(b) रचनात्मक कार्यों में लगाना चाहिए  
(c) अपराध भावना का परिष्कार कर समाज के लिए उपयोगी बनाना चाहिए 
(d) दया और सहहानुभूति जैसे मानवोचित गुणों के विकास का अवसर देना चाहिए
(e) इनमें से कोई नहीं 

निर्देश(6-10) नीचे दिए गए गद्यांश के आधार पर पांच प्रश्न दिए गए है. गद्यांश का अध्ययन कीजिये और प्रश्न का उत्तर दीजिये.
मनुष्य शारीरिक कष्ट से ही पीछे हटने वाला प्राणी नहीं है. मानसिक क्लेश की संभावना से भी बहुत से कर्मों की ओर प्रवृत्त होने का साहस उसे नहीं होता. जिन बातों से समाज के बीच उपहास, निंदा, अपमान इत्यादि का भय रहता है उन्हें अच्छी और कल्याणकारी समझते हुए भी बहुत-से लोग उनसे दूर रहते हैं. प्रत्यक्ष हानि देखते हुए भी कुछ प्रथाओं का अनुसरण बडे़-बडे़ समझदार तक इसलिए करते चलते हैं कि उनके त्याग से वे बुरे कहे जाएंगे, लोगों में उनका वैसा आदर-सम्मान न रह जाएगा. उनके लिए मानग्लानि का कष्ट सब शारीरिक क्लेशों से बढ़कर होता है. जो लोग मान-अपमान का कुछ भी ध्यान न करके, निंदा-स्तुति की कुछ भी परवाह न करके किसी प्रचलित प्रथा के विरूद्ध पूर्ण तत्परता और प्रसन्नता के साथ कार्य करते जाते हैं वे एक ओर तो उत्साही और वीर कहलाते हैं, दूसरी ओर भारी बेहया. 

6. साधारणतः मनुष्य पीछे हट जाता है 
(a) शारीरिक कष्टों की संभावना से 
(b) मानसिक क्लेशों की संभावना से 
(c) शारीरिक अथवा मानसिक कलेशों की संभावना से 
(d) शारीरिक और मानसिक क्लेशों की संभावना से 
(e) इनमें से कोई नहीं

7. अनेक लोग कल्याणकारी बातों से भी इसलिए दूर रहते हैं क्योंकि 
(a) उन्हें समाज की चिन्ता रहती है 
(b) वे समाज के उपहास और निदा से बचना चाहते हैं 
(c) उनमें समाज के विरोध का साहस नहीं होता 
(d) समाज उनके प्रत्येक कार्य का उपहास और उनका अपमान करता है
(e) इनमें से कोई नहीं 

8. बडे़-बडे़ समझदार लोग भी अनेक हानिकारक प्रथाओं का इसलिए अनुसरण करते हैं क्योंकि 
(a) वे आत्मसम्मान की कीमत पर समाज का विरोध नहीं कर पाते 
(b) अन्य लोगों की तुलना में वे अपने सम्मान को अधिक महत्त्व देते हैं 
(c) उनके लिए आत्मसम्मान समाज-हित से अधिक महत्त्वपूर्ण है 
(d) वे समाज द्वारा दिए गए आदर-सम्मान से घबराते हैं
(e) इनमें से कोई नहीं

9. अनेक समझदार लोगों के लिए 
(a) शारीरिक कष्ट मानसिक कष्ट से अधिक संतप्तकारक होता है 
(b) मानसिक कष्ट शारीरिक कष्ट से अधिक संतृप्तकारक होता है 
(c) मानसिक और शारीरिक कष्ट समान रूप से संतप्तकारक होते हैं 
(d) अपना सम्मान घटने का कष्ट शारीरिक कष्ट से अधिक संतप्तकारक होता है
(e) इनमें से कोई नहीं

10. उत्साही वह है जो
(a) अपने मान-अपमान और निदा-स्तुति की परवाह नहीं करता 
(b) अपनी आलोचना की परवाह न कर परंपरागत मान्यताओं के विरूद्ध चलता है 
(c) स्वयं को बेहया कहलवाने के लिए भी तैयार हो 
(d) सदैव प्रचलित प्रथा का विरोध कर आगे बढ़ता जाता है 
(e) इनमें से कोई नहीं

निर्देश(11-15) नीचे दिए गए गद्यांश के आधार पर पांच प्रश्न दिए गए है. गद्यांश का अध्ययन कीजिये और प्रश्न का उत्तर दीजिये.
प्रत्येक युग के महान विचारकों ने धन-संग्रह की प्रवृत्ति की निदा की है. धन को इसलिए हेय दृष्टि से देखा जाता है कि गर्व, आलस्य तथा अन्य अवगुण इसका अनुसरण करते हैं. निस्सन्देह हम सामान्यतः यह देखते हैं कि मनुष्य जितना ही धनी होता है उतना ही पुण्य अथवा श्रेष्ठ कार्यों से दूर रहता है. किन्तु सूक्ष्म निरीक्षण करने पर हम पाएंगे कि धन स्वयं में दोषपूर्ण नहीं है. वस्तुतः धन के अनुचित प्रयोग की ही निदा की जानी चाहिए। हमारा कर्त्तव्य है कि हम जन-कल्याण के लिए सम्पत्ति-दान करके समाज के प्रति सत्यनिष्ठ रहे. यदि हम अपने देश के पूर्ण विकास के इच्छुक हैं तो केवल निजी लाभों को दृष्टि में नहीं रखा जाना चाहिए. 

11. धन-संग्रह की प्रवृत्ति निन्दनीय है क्योंकि अधिक धन 
(a) मनुष्य को लोभी बनाता है
(b) अभिमान, आलस्य और अन्य अवगुणों को जन्म देता है 
(c) अपने कर्त्तव्य से दूर करता है
(d) जीवन को कष्टमय बनाता है
(e) इनमें से कोई नहीं

12. धन-संचय दोष न होकर दोष है धन का 
(a) दुरूपयोग 
(b) अत्यधिक लाभ 
(c) व्यक्तिगत कार्यों के लिए उपयोग 
(d) तिरस्कार 
(e) इनमें से कोई नहीं

13. धन का उचित उपयोग करने के लिए हमें चाहिए  
(a) निजी लाभ की ओर ध्यान देना 
(b) अर्जित सम्पत्ति दान में दे देना 
(c) समाज-हित को सर्वोपरि समझना 
(d) जनकल्याण के लिए सम्पत्ति-दान के साथ समाज के प्रति निष्ठावान् होना
(e) इनमें से कोई नहीं 

14. श्रेष्ठ कार्यों से व्यक्ति दूर होने लगता है, जब वह 
(a) अकिंचन हो जाता है 
(b) पाप कर्मों की ओर प्रवृत्त हो जाता है 
(c) अधिक धनी होता जाता है 
(d) वास्तविक लक्ष्य को विस्मृत कर बैठता है.
(e) इनमें से कोई नहीं 

15. इस अवतरण का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक हो सकता है 
(a) धन-संग्रह 
(b) जीवन के लिए धन 
(c) धन का समुचित उपयोग 
(d) धन की महत्ता
(e) इनमें से कोई नहीं





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