‘वन स्टेट-वन आरआरबी’ (One State-One RRB) पॉलिसी क्यों है खबर में?
ग्रामीण बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने ‘वन स्टेट-वन आरआरबी’ (OS-OR) पॉलिसी का चौथा चरण लागू कर दिया है। इस चरण में 10 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का विलय किया गया है। इसके बाद देशभर में RRBs की संख्या घटकर 43 से 28 रह गई है।
इस कदम का उद्देश्य है – ऑपरेशनल वायबिलिटी बढ़ाना, लागत कम करना और ग्रामीण बैंकिंग को अधिक प्रभावी बनाना। हालांकि, इसके साथ स्टाफिंग, टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन और क्षेत्रीय जोखिमों को लेकर चिंताएं भी बनी हुई हैं।
क्या है ‘वन स्टेट-वन आरआरबी’ पॉलिसी?
- यह नीति वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा शुरू की गई एक सुधार योजना है।
- इसके तहत एक राज्य में मौजूद सभी RRBs को मिलाकर एक ही इकाई बनाई जाती है।
- इसकी शुरुआत 2005 में डॉ. व्यास कमेटी (2001) की सिफारिशों के बाद की गई।
- विलय क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 की धारा 23A(1) के तहत किया जाता है।
RRB विलय की अब तक की चार चरणों की यात्रा
- पहला चरण (2006–2010): एक ही प्रायोजक बैंक वाले RRBs का विलय, संख्या 196 से घटकर 82।
- दूसरा चरण (2013–2015): अलग-अलग प्रायोजक बैंकों वाले RRBs का एकीकरण, संख्या 82 से घटकर 56।
- तीसरा चरण (2019–2021): बड़े राज्यों में OS-OR लागू, संख्या 56 से घटकर 43।
- चौथा चरण (2025 से आगे): अब संख्या घटकर 28 रह गई, प्रत्येक नए RRB की अधिकृत पूंजी ₹2,000 करोड़ तय की गई।
प्रभाव और उपलब्धियां
- 2023-24 में RRBs ने अब तक का सबसे बड़ा शुद्ध लाभ ₹7,571 करोड़ दर्ज किया।
- विलय से लाभप्रदता, पूंजी, एसेट क्वालिटी और बिज़नेस वॉल्यूम में सुधार हुआ।
- ग्रामीण विकास और कृषि वित्त को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
चुनौतियां अभी भी बरकरार
- लागत और दक्षता: 2023-24 में RRBs का कॉस्ट/इनकम रेशियो 77.4% और वेतन/ऑपरेटिंग खर्च रेशियो 72% रहा।
- क्षेत्रीय जोखिम: किसी राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था प्रभावित होने पर पूरा असर एक ही RRB पर पड़ेगा।
- प्रशासनिक जटिलताएं: केंद्र, राज्य और प्रायोजक बैंकों की साझी हिस्सेदारी के कारण निर्णय लेने में देरी।
- टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी: डिजिटल बैंकिंग अपनाने में भारी निवेश और ग्रामीण ग्राहकों की वित्तीय साक्षरता की कमी।
Rajasthan Gramin Bank Merger News 2025
ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक और बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का विलय कर एक नई इकाई “राजस्थान ग्रामीण बैंक” का गठन किया है। यह विलय 1 मई 2025 से लागू हो गया है। यह निर्णय भारत सरकार की “एक राज्य, एक आरआरबी” नीति के तहत लिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में ग्रामीण बैंकों के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना और उनकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना है।
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