K-5 vs JL-3: भारत और चीन की सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) की पूरी तुलना
K-5 vs JL-3 Missile Comparison आज के समय में भारत और चीन की परमाणु रणनीति को समझने के लिए बेहद अहम विषय बन चुका है। आधुनिक युद्ध प्रणाली में Submarine-Launched Ballistic Missiles (SLBM) को सबसे ज्यादा सुरक्षित और घातक न्यूक्लियर हथियारों में गिना जाता है, क्योंकि इन्हें समुद्र की गहराइयों में छिपी न्यूक्लियर सबमरीन से लॉन्च किया जाता है।
भारत और चीन — दोनों ही देश अपनी Second Strike Capability को मजबूत करने के लिए SLBM तकनीक पर तेजी से काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारत की K-5 SLBM और चीन की JL-3 SLBM रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
SLBM क्या होती है और क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
SLBM (Submarine-Launched Ballistic Missile) वह बैलिस्टिक मिसाइल होती है जिसे न्यूक्लियर पनडुब्बी (SSBN) से लॉन्च किया जाता है। लॉन्च के बाद मिसाइल पानी से बाहर निकलती है, अंतरिक्ष में बैलिस्टिक पथ तय करती है और फिर लक्ष्य पर वार करती है।
SLBM की रणनीतिक अहमियत
- पनडुब्बियां ट्रैक करना बेहद मुश्किल
- न्यूक्लियर हमले के बाद भी जवाबी हमला संभव
- Second-Strike Nuclear Deterrence की गारंटी
- ज़मीन आधारित मिसाइल सिस्टम पर निर्भरता कम
- 24×7 At-Sea Deterrence Capability
इसी कारण SLBM किसी भी देश की Nuclear Triad (Land-Air-Sea) का सबसे मजबूत स्तंभ मानी जाती है।
India’s K-5 SLBM: भारत की समुद्री परमाणु ताकत का विस्तार
K-5 मिसाइल का ओवरव्यू
- K-5 SLBM भारत की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे DRDO द्वारा विकसित किया जा रहा है।
K-5 SLBM की प्रमुख विशेषताएं
- प्रकार: Submarine-Launched Ballistic Missile
- अनुमानित रेंज: 5,000 – 6,000 किमी
- ईंधन: Solid Fuel, Multi-Stage
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: भविष्य की Arihant-class Follow-on (S5 Class) SSBN
- वारहेड: Nuclear-capable, संभावित MIRV क्षमता
- स्थिति: Development और Testing Phase
K-5 की रणनीतिक भूमिका
K-5 मिसाइल, भारत की मौजूदा K-4 SLBM (3,500 किमी) से कहीं ज्यादा एडवांस है। इसकी लंबी रेंज की वजह से भारतीय न्यूक्लियर सबमरीन Indian Ocean के सुरक्षित क्षेत्रों में रहते हुए भी दुश्मन के गहरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकती हैं।
- यह भारत की No First Use (NFU) नीति, Credible Minimum Deterrence, सुरक्षित जवाबी हमले की क्षमता को और ज्यादा मजबूत बनाती है।
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China’s JL-3 SLBM: इंटरकॉन्टिनेंटल न्यूक्लियर पावर
JL-3 मिसाइल का ओवरव्यू
- JL-3 (Julang-3) चीन की सबसे आधुनिक और लंबी दूरी की SLBM है, जिसे इंटरकॉन्टिनेंटल स्ट्राइक के लिए डिजाइन किया गया है।
JL-3 SLBM की प्रमुख विशेषताएं
- प्रकार: Intercontinental SLBM
- अनुमानित रेंज: 9,000+ किमी
- ईंधन: Solid Fuel
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: Type 094 और भविष्य की Type 096 SSBN
- वारहेड: Nuclear, MIRV-capable
- स्थिति: Operational Deployment की ओर
JL-3 की रणनीतिक ताकत
JL-3 मिसाइल के साथ चीन की सबमरीन अपनी सुरक्षित समुद्री सीमा छोड़े बिना दूर-दराज के महाद्वीपों तक न्यूक्लियर हमला करने में सक्षम हो जाती हैं।
- यह चीन को Global Second-Strike Capability, Land-based missiles पर कम निर्भरता, Major Powers के खिलाफ मजबूत डिटरेंस प्रदान करती है।
K-5 vs JL-3: टेक्निकल तुलना (Comparison Table)
| विशेषता | भारत – K-5 SLBM | चीन – JL-3 SLBM |
|---|---|---|
| मिसाइल का प्रकार | लंबी दूरी की सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) | अंतरमहाद्वीपीय सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM-SLBM) |
| अनुमानित मारक क्षमता (रेंज) | 5,000 – 6,000 किलोमीटर | 9,000 किलोमीटर से अधिक |
| लॉन्च की जाने वाली पनडुब्बी | भविष्य की अरिहंत-क्लास फॉलो-ऑन (S5 क्लास) SSBN | टाइप-094 / टाइप-096 न्यूक्लियर SSBN |
| वारहेड क्षमता | परमाणु सक्षम, संभावित MIRV क्षमता | परमाणु सक्षम, पूर्ण MIRV क्षमता |
| मुख्य रणनीतिक भूमिका | क्षेत्रीय व विस्तारित परमाणु प्रतिरोध (Deterrence) | वैश्विक अंतरमहाद्वीपीय परमाणु प्रतिरोध |
Strategic Implications: भारत और चीन के लिए क्या है इसके मायने?
भारत के लिए
- सुरक्षित समुद्री पेट्रोल ज़ोन
- भरोसेमंद Second Strike Capability
- Nuclear Triad का मजबूत Sea-Leg
- Indo-Pacific क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन
चीन के लिए
- इंटरकॉन्टिनेंटल न्यूक्लियर रीच
- सबमरीन की सुरक्षा बढ़ी
- Global Strategic Influence में इजाफा
- Nuclear Survivability मजबूत


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