मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है—Iran और Israel के बीच जारी संघर्ष के 20वें दिन हालात और बिगड़ गए हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनके ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमला हुआ, तो “Zero Restraint” के साथ जवाब दिया जाएगा। यह बयान उस समय आया है जब इज़राइल ने ईरान के “साउथ पार्स गैस फील्ड” से जुड़े ठिकाने पर हमला किया।
गैस साइट पर हमला, वैश्विक असर शुरू
ईरान द्वारा कतर के Ras Laffan गैस फैसिलिटी पर जवाबी हमला किया गया, जिससे LNG एक्सपोर्ट क्षमता में करीब 17% की गिरावट का खतरा पैदा हो गया है। इसका असर यूरोप, एशिया और अन्य देशों की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है।
तेल बाजार में उथल-पुथल
इस संघर्ष का सीधा असर तेल बाजार पर भी देखने को मिला—ग्लोबल ऑयल प्राइस $115 प्रति बैरल तक पहुंच गया, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें फिर से उछाल मार सकती हैं।
अमेरिका भी सक्रिय मोड में
Donald Trump ने इस बीच अमेरिकी सेना के लिए $200 बिलियन की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है, जिसे उन्होंने “देश की सुरक्षा के लिए जरूरी” बताया। वहीं, खबरें यह भी हैं कि एक अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को ईरानी फायरिंग के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा
Benjamin Netanyahu ने कहा कि इज़राइल ने साउथ पार्स गैस साइट पर हमला खुद किया और अब अमेरिका की सलाह के बाद ऐसे हमलों को दोहराने से बचने पर विचार किया जा रहा है। इसके बावजूद, मिडिल ईस्ट के कई देशों में मिसाइल इंटरसेप्शन और जवाबी कार्रवाई जारी है।
क्या बढ़ सकता है वैश्विक संकट?
- ऊर्जा सप्लाई चेन पर असर
- तेल कीमतों में अस्थिरता
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में घबराहट
- बड़े स्तर पर युद्ध का खतरा
इतिहास और पृष्ठभूमि (Iran-Israel Timeline):
- स्थापना और प्रारंभिक संबंध:
- 1948 में इजराइल के स्थापना के बाद, ईरान ने एकमात्र मुस्लिम देश के रूप में इजराइल को मान्यता दी थी। ईरान और इजराइल के बीच अच्छे राजनयिक और आर्थिक संबंध थे।
- 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद, ईरान का शासन बदल गया और ईरान ने इजराइल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
- इस्लामिक क्रांति और उसके प्रभाव:
- 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद, ईरान ने इजराइल को “यहूदी शासन” और “राष्ट्रों का दुश्मन” करार दिया। इसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में तेजी से गिरावट आई।
- आतंकी संगठन और संघर्ष:
- ईरान ने कई बार अपने समर्थन से लब्बेक और हिज़्बुल्लाह जैसे आतंकवादी संगठनों को सहायता दी है जो इजराइल के खिलाफ संघर्ष करते हैं।
- इजराइल ने इन संगठनों द्वारा किए गए हमलों का जवाब देने के लिए कई सैन्य अभियान चलाए हैं।
- परमाणु कार्यक्रम:
- ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक बड़ा विवाद का कारण बना है। इजराइल का मानना है कि ईरान परमाणु हथियारों का विकास कर रहा है, जो इजराइल के अस्तित्व के लिए खतरा हो सकता है।
- ईरान ने बार-बार यह दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन इसका दावा अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा संदेह के साथ देखा गया है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ:
- कई पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका, ने इजराइल का समर्थन किया है और ईरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाए हैं।
- ईरान ने इजराइल को कई बार धमकाया है और यहूदी राज्य के खिलाफ अपने एजेंडे को जोरदार तरीके से पेश किया है।


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