आईबीपीएस आरआरबी परीक्षा 2019 : हिंदी भाषा के स्टडी नोट्स | भाग- 6

आईबीपीएस आरआरबी परीक्षा 2019 : हिंदी भाषा के स्टडी नोट्स | भाग- 6


आप सभी जानते हैं कि आईबीपीएस आरआरबी  परीक्षा 2019 की अधिसूचना जारी की जा चुकी है. परीक्षा के पाठ्यक्रम के आधार पर आपकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए ADDA247 आपके लिए हिंदी भाषा के स्टडी नोट्स लेकर आया है. ये नोट्स मुख्य परीक्षा आने तक आपको पहले से ही तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे. अपने साथियों के लिए हम हिंदी प्रश्नोत्तरी आपको पहले से ही उपलब्ध करा रहे हैं. सभी जानते हैं कि बैंकिंग परिक्षाओं में केवल आरआरबी ही एकमात्र ऐसी परीक्षा है , जो आपको अपनी भाषा का चयन का विकल्प देता है जिसमें आप अंग्रेजी के स्थान  पर हिंदी भाषा चुन सकते हैं. यह हिंदी भाषा क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए सफलता पाने का एक सुनहरा मौक़ा है, क्योंकि हम अपनी भाषा में अधिक से अधिक अंक स्कोर करने में सक्षम होते हैं. यदि आपका लक्ष्य इस वर्ष आईबीपीएस आरआरबी में सफलता पाना है, तो अभी से मेंस की तैयारी में जुट जाएँ. अपनी तैयारी को और बेहतर बनाते हुए अपनी सफलता सुनिश्चित कीजिये. इस बार हम आपको 'अव्यवस्थित वाक्य खण्डों को सुव्यवस्थित करना' से सम्बन्धित स्टडी नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं. 

 'अव्यवस्थित वाक्य खण्डों को सुव्यवस्थित करना' 


किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में हिंदी भाषा खंड में ‘अव्यवस्थित वाक्य खण्डों को सुव्यवस्थित करना’ से संबंधित प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। विशेषकर आईबीपीएस आरआरबी की पीओ और क्लर्क परीक्षा में इन प्रश्नों की अधिकता होती है इसलिए इन प्रश्नों से संबंधित प्रश्नों का अध्ययन एवं अभ्यास करना आवश्यक हो जाता है लेकिन अक्सर देखा गया है कि विद्यार्थी इन प्रश्नों का अभ्यास करने से बचते हैं। उन्हें लगता है कि ये प्रश्न तो बहुत सरल होते हैं और इस कारण परीक्षा में अत्यधिक आत्मविश्वास में आकर गलत उत्तर का चयन करते हैं।      
इस लेख में हम आपको ‘अव्यवस्थित वाक्य खण्डों को सुव्यवस्थित करना’ से संबंधित सामाग्री से अवगत करवाएगें जिससे आप निश्चित रूप से इस प्रकार के प्रश्नों को हल कर सकते हैं आपको केवल ध्यानपूर्वक इन बिन्दुओं का अध्ययन करके अभ्यास करना है। इस लेख के अंत में आपको इन प्रश्नों से संबंधित प्रश्न भी दिए गए हैं ताकि आप इन प्रश्नों का अभ्यास कर परीक्षा में इस भाग से अधिकतम अंक प्राप्त कर सके।

अव्यवस्थित वाक्य खण्डों को सुव्यवस्थित करना – इस भाग के प्रश्नों को हल करने के लिए आपको दिए गये सभी वाक्यांशों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना है। इस प्रकार के प्रश्नों में आपको प्रथम और अंतिम वाक्य निर्धारित स्थान पर दिया जाता है, इन दोनों वाक्यों के मध्य आने वाले शेष चार वाक्यों को व्यवस्थित क्रम में लगाना होता है। वाक्य छोटा या बड़ा किसी भी विचार को व्यक्त करने की क्षमता रखता है, आप वाक्य में व्यक्त इसी भाव या विचार को जानने का प्रयास कीजिए और उत्तर दीजिये। वाक्य सरंचना करते समय कर्त्ता, कर्म, क्रिया आदि व्याकरणिक भागों पर ध्यान अवश्य दें। यदि एक बार अध्ययन से वाक्य सरंचना करने में कठिनाई आए तो पुन अध्ययन कीजिये, ऐसा करने से आपको पहले की  अपेक्षा वाक्य सरंचना में आसानी होगी।      
   
उपर्युक्त सामग्री का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के बाद ‘अव्यवस्थित वाक्य खण्डों को सुव्यवस्थित करना’ से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देने में आसानी होगी, इन्हें पढ़ने से विद्यार्थी में इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने की एक समझ विकसित होगी। नीचे इस प्रकार के कुछ प्रश्न दिए हैं आप इनका अभ्यास जरुर करें क्योंकि अभ्यास से ही हर कार्य सिद्ध होता है।  

निम्नलिखित प्रश्नों में पहले और अन्तिम वाक्यों को क्रमशः (1) और (6) की संज्ञा दी गई है। इनके मध्यवर्ती वाक्यों को चार भागों में बाँटकर य, र, ल, व की संज्ञा दी गई है। ये चारों वाक्य व्यवस्थित क्रम में नहीं है। इन्हें ध्यान से पढ़कर दिए गए विकल्पों में से उचित क्रम चुनिए, जिससे सही अनुच्छेद का निर्माण हो।         
प्रश्न1. (1) मानस-सिन्धु में उठने वाली स्मृति-तरंगें 
(य) जो कभी हमारे थे
(र) पर वे अपनी मूक भाषा में एक संदेश हमें दे जाती हैं
(ल) और उन क्षणों को
(व) काल के विषम तट से टकराकर विलीन भले ही हो जाए
(6) पुनर्जीवित सा कर जाती है। 
(a)  ल र य व           (b)  व र ल य                  (c) व ल र य
(d)   य ल व र       (e) इनमें से कोई नहीं
L1Difficulty 3 
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प्रश्न2. (1) मनुष्य पांव से चलता है
(य) समुदाय से चलता है
(र) तब उसे जीवन कहते हैं
(ल) प्राणों से चलता है
(व) तब उसे यात्रा कहते हैं
(6) तब उसे समाज कहते हैं। 
(a) व ल र य         (b)  व ल य र      (c)  य र व ल
(d) ल र व य        (e) इनमें से कोई नहीं       
L1Difficulty 3 
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प्रश्न3. (1) सच्ची बात तो यह है कि   
(य) वह अपना मनोरंजन संगीत और अभिनय जैसे
(र) किसी भी युग का प्राणी ऐसा नीरस
(ल) आनंददायक साधनों के
(व) और ह्रदयहीन नहीं होता है
(6) द्वारा नहीं करता। 
(a)  व ल र व        (b)  र व ल र            (c)     ल र व य
(d)   र व य ल      (e) इनमें से कोई नहीं   
L1Difficulty 3 
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प्रश्न4. (1) मानव जीवन के   
(य) न ही आज की भांति
(र) संकल्पना नहीं थी और
(ल) अनुशासन की कोई
(व) आदिकाल में
(6) बड़े-बड़े नगर या राज्य ही थे।     
(a) र य व ल       (b)  ल व र य                  (c)      व ल र य
(d)  व ल य र       (e) इनमें से कोई नहीं     
L1Difficulty 3 
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उत्तर 

उत्तर 1. (b) मानस-सिन्धु में उठने वाली स्मृति-तरंगें काल के विषम तट से टकराकर विलीन भले ही हो जाए पर वे अपनी मूक भाषा में एक संदेश हमें दे जाती हैं और उन क्षणों को जो कभी हमारे थे पुनर्जीवित सा कर जाती है।   
उत्तर 2. (a) मनुष्य पांव से चलता है तब उसे यात्रा कहते हैं प्राणों से चलता है तब उसे जीवन कहते हैं समुदाय से चलता है तब उसे समाज कहते हैं।       
उत्तर 3. (d) सच्ची बात तो यह है कि किसी भी युग का प्राणी ऐसा नीरस और ह्रदयहीन नहीं होता है वह अपना मनोरंजन संगीत और अभिनय जैसे आनंददायक साधनों के द्वारा नहीं करता।
उत्तर 4 . (c) मानव जीवन के आदिकाल में अनुशासन की कोई संकल्पना नहीं थी और न ही आज की भांति बड़े-बड़े नगर या राज्य ही थे।