17/04/2017

क्या हिंदी भाषी छात्र भी एक बैंकर बन सकता है ?


वर्तमान समय में बैंकिंग समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा गलाकाट होती जा रही है. समय और काम की मांग को देखते हुए दिन-प्रतिदिन परीक्षा के पैटर्न में बदलाव हो रहे हैं और यह कठिन होती जा रही है. पहले से ही ये धारणा बनी हुई है कि यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग समेत विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाएं इंग्लिश मीडियम के उम्मीदवारों के लिए तुलनात्मक रूप से अधिक कठिन होती हैं, ऐसे में हिंदी पृष्ठभूमि (बैकग्राउंड) से संबंधित उम्मीदवारों की मुश्किलों में भी इजाफा हुआ है. उन्हें अनेक समस्याओं विशेषकर सही अध्ययन सामग्री का अभाव, का सामना करना पड़ता है. लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? क्या वाकई में हिंदी भाषी उम्मीदवार के लिए बैंकर बनना, आईएएस बनना, सिविल सेवाओं में भर्ती पाना या सरकारी नौकरी पाना एक टेढ़ी खीर है? क्या हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों का सरकारी नौकरी पाने या बैंकर बनने का सपना मात्र सपना ही रह जायेगा? क्या वो UPSC, SSC, IBPS की दीवार को तोड़कर कभी अपने सपनों की उड़ान नहीं उड़ सकते ?

जी नहीं दोस्तों! उनके लिए भी ये संभव है. एक हिंदी भाषी उम्मीदवार भी इन सभी परीक्षाओं में न सिर्फ सफल हो सकता है बल्कि अच्छे अंक हासिल कर सकता है, अच्छी रैंक प्राप्त कर सकता है. जी हाँ! आप भी आईबीपीएस के तिलिस्म को तोड़कर एक बैंकर बन सकते हैं, आप भी SSC, UPSC को अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत का लोहा मनवाते हुए एक सिविल सेवक, आईएएस, आईपीएस, सरकारी अधिकारी बन सकते हैं. इन शानदार पदों के दरवाजे आपके लिए भी वैसे ही और उतने ही खुले हैं जितना कि किसी इंग्लिश माध्यम के उम्मीदवारों के लिए. बस जरुरत है तो सिर्फ इन परीक्षाओं की प्रकृति (Nature) को समझने की, उसकी प्रकृति और मांग के अनुसार योजनाबद्ध तरीके से रणनीति बनाकर सही दिशा में तैयारी करने की और स्वयं को उसके लिए योग्य और सर्वश्रेष्ठ बनाने की.

आखिर एक हिंदी भाषी उम्मीदवार कैसे और कहाँ पीछे रह जाता है? क्या उसकी मेहनत में कोई कमी है? क्या उसका समर्पण (dedication) कम है? क्या उसकी प्रतिभा अंग्रेजी भाषी उम्मीदवारों से कम होती है? क्या IBPS, SBI, UPSC, SSC आदि हिंदी भाषी उम्मीदवारों को कम आंकते हैं? या फिर तैयारी की दिशा, तैयारी के तरीके में कोई कमी है अथवा इन असफलताओं के पीछे का कारण उचित मार्गदर्शन और सही अध्ययन सामग्री का अभाव है? आज से हम ऐसे ही कुछ मुददों पर चर्चा करेंगे और आपकी समस्याओं का समाधान करेंगे.

दोस्तों! इस क्रम में एक हिंदी भाषी या मानविकी पृष्ठभूमि (Humanities/Arts background) के उम्मीदवार की सबसे पहली समस्या यह है कि वह अपने मन में यह धारणा बना लेता है कि IBPS, SSC, UPSC आदि की परीक्षा केवल अंग्रेजी बैकग्राउंड के उम्मीदवारों के लिए है या फिर उन्हें इन परीक्षाओं में चयन में प्राथमिकता दी जाती है, या हम सोचते हैं कि साक्षात्कार में हिंदी भाषी उम्मीदवारों से भेदभाव किया जाता है आदि. लेकिन दोस्तों, वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं है. इन परीक्षाओं में उम्मीदवार यदि न्यूनतम शैक्षणिक अहर्ता पूरी करता है तो शेष पूरी चयन प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, प्रश्न पत्र, मार्किंग प्रक्रिया अर्थात जांचने का तरीका सभी के लिए एक जैसा और भेदभाव रहित है.

वैसे भी बैंकिंग, एसएससी समेत लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं का पहला चरण (Prelims – प्रारंभिक परीक्षा) तो बहु-विकल्पीय प्रश्नों (Multiple Choice Questions) का होता है जिसमें आपका माध्यम मायने नहीं रखता. कंप्यूटर को नहीं मालूम होता कि आपने हिंदी में उत्तर दिया है या इंग्लिश में, वह तो केवल सही या गलत चिन्हित उत्तरों को गिनता है.

इसी प्रकार अनेक परीक्षाओं जैसे बैंक या एसएससी की परीक्षाओं में दूसरा चरण (टियर-II या मुख्य परीक्षा) भी बहु-विकल्पीय प्रश्नों (Multiple Choice Questions) वाला होता है. अतः यहाँ भी माध्यम कोई बाधा नहीं है. अब बात करें टियर-III परीक्षा की जो सामान्यतः विवरणात्मक (descriptive) होता है. एसएससी में उम्मीदवार टियर-III परीक्षा हिंदी में भी दे सकते हैं. अतः इसमें भी माध्यम के आधार पर कोई समस्या नहीं है, आपने सही उत्तर दिया है या नहीं, ये मायने रखता है. यूपीएससी आदि भी आपकी अपनी चुनी हुई भाषा में मुख्य परीक्षा लिखने की अनुमति देते हैं. 

अब बात करते हैं बैंकिंग परीक्षाओं जैसे IBPS, SBI, BoB आदि की जिसमें टियर-III परीक्षा इंग्लिश में होती है या जहाँ साक्षात्कार या समूह चर्चा (group discussion) अनिवार्य होती है. सामान्यतः इस चरण को लेकर हिंदी भाषी उम्मीदवारों में विशेष चिंता देखने को मिलती है. इसके बारे में हम आगे के लेखों में चर्चा करेंगे.

हिंदी भाषी उम्मीदवारों की दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण समस्या हिंदी भाषा में बाज़ार में नए पैटर्न पर आधारित गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री की कमी होना है. यह हिंदी से संबंधित उम्मीदवारों के लिए विकट समस्या है. लेकिन अब डिजिटल युग में इस समस्या का भी समाधान उपलब्ध हो गया है. आज प्रत्येक उम्मीदवार की जेब में रहने वाला स्मार्टफोन उसके लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा उपकरण (Eduction tool) बनकर उभरा है; और इसमें उसकी सहायता की है विभिन्न कोचिंग संस्थानों के ऑनलाइन संस्करणों ने. आज ऐसे अनेक वेब पोर्टल्स, मोबाइल एप्स, यूट्यूब चैनल उपलब्ध हो गए हैं जो आपको घर बैठे अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं. इसमें hindi.bankersadda, hindi.sccadda जैसी वेबसाइट्स, Adda247 जैसे मोबाइल एप और यूट्यूब चैनल आपको नए पैटर्न पर अद्यतन (अपडेट) और गुणवत्तापूर्ण सामग्री निशुल्क उपलब्ध करा रहे हैं. बस जरुरत है तो आपको अपने मोबाइल फोन और इंटरनेट के सही उपयोग की. इन माध्यमों के जरिये आप रोजाना विभिन्न विषयों पर अभ्यास/प्रैक्टिस के लिए दैनिक क्विज़ेस, लेख, वीडियो, कर्रेंट अफेयर्स और समसामयिक लेख इत्यादि निशुल्क उपलब्ध हैं जिनका कोई भी उम्मीदवार कहीं भी बैठकर उपयोग कर सकता है और उनसे लाभ ले सकता है. इस बारे में भी हम आगामी लेखों में विस्तृत जानकारी देंगे.   

हिंदी पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों की तीसरी सबसे बड़ी समस्या इंग्लिश या अंग्रेजी है. हजारों की संख्या में ऐसे उम्मीदवार होते हैं जो गणित, रीजनिंग आदि में तो अच्छे अंक हासिल कर लेते हैं लेकिन वे इंग्लिश की कट-ऑफ भी नहीं पार कर पाते. एक हिंदी भाषी होने के कारण इंग्लिश पर बहुत अच्छी पकड़ न होना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन इसके साथ-साथ आप सब एक उम्मीदवार या विद्यार्थी या learner भी हैं और अच्छा विद्यार्थी या अच्छा learner वही होता है जो जरुरत के अनुसार नया ज्ञान या नयी चीज सीखने में कोई झिझक न दिखाए बल्कि प्रसन्नता से अपने उपयोग और लाभ के लिए कुछ नया सीखे. विद्वान लोगों ने कहा भी है कि एक सामान्य मनुष्य को भी हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहना चाहिए. आपको तो परीक्षा देनी है जो आपको आपके सपनों तक पहुंचाएगी और आपका भविष्य संवारेगी. और फिर, आज के समय में, सरकारी नौकरी से इतर भी हर जगह आपको इंग्लिश की थोड़ी बहुत जानकारी तो आवश्यक है ही क्योंकि ये एक वैश्विक भाषा है.

वैसे भी कहीं भी चयन के बाद भी आपको रोजाना के कामों में इंग्लिश से दो-चार होना पड़ेगा, इसलिए बाद में भी तकलीफ हो, स्वयं पर झुझलाहट हो, इससे अच्छा है कि आज ही इस पर अपनी पकड़ बनायें और खुद को जल्दी और एक अच्छा  भविष्य दे सकें यानि अच्छे पद के लिए आपका चयन हो. अब बात रही कि अपनी कमजोर नस इंग्लिश को मजबूत करें तो कैसे, तो दोस्तों! वास्तव में ये इतनी कठिन भी नहीं है, बस जरुरत है तो अपनी झिझक दूर कर एक बार अपना मन पक्का करने की और स्वयं पर विश्वास करने की कि हाँ मैं इंग्लिश सीखूंगा और मैं ये सीख सकता हूँ. इसके लिए शुरूआती चरण है - नियमित रूप से कोई भी इंग्लिश का समाचार पत्र पढ़ना, धीरे-धीरे बिना डरे अपनी दिन प्रतिदिन की बात-चीत में इंग्लिश के शब्दों का प्रयोग शुरू करना और इसके माध्यम से अपनी शब्दावली को मजबूत करने का निरंतर प्रयास करना. इससे बहुत जल्दी ही आप इस भाषा में सहज होने लगेंगे, उसके बाद परीक्षा के दृष्टिकोण से तैयारी करने में आपको उतनी कठिनाई नहीं होगी और आप बाकी विषयों की तरह इसकी भी तैयारी कर सकेंगे. 

दोस्तों! इस लेख में हमने एक हिंदी भाषी प्रतियोगी के सामने की कुछ प्रमुख समस्याओं पर चर्चा की है. इस श्रृंखला में अपने आगामी लेखों में हम इस बारे में और विस्तृत चर्चा करेंगे, साथ ही हम बताएँगे कि हिंदी भाषा के साथ भी आपके पास अनेक अवसरों की भरमार है. यहाँ तक कि अनेक ऐसे विकल्प भी हैं जहाँ हिंदी भाषा ही आपकी सहायक हो सकती है. इसलिए सबसे पहले अपने मन से ये हीनता बोध निकाल फेंके कि आपका हिंदी भाषी होना आपकी कमजोरी है, बल्कि यदि आप उसी में महारत हासिल कर लें तो यही आपकी ताकत भी बन सकता है. आप सभी हिंदी भाषी छात्रों के पास भी वह योग्यता है जिससे आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है, बस इसके लिए लक्ष्य निर्धारण, कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है. बैंकर्स अड्डा हमेशा आपका मार्गदर्शन करने के लिए आपके साथ है...

बहुत बहुत शुभकामनायें !!


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