क्या है हीमोफीलिया और क्यों मनाया जाता है यह दिन?
हर साल 17 अप्रैल को पूरी दुनिया में विश्व हीमोफीलिया दिवस (World Haemophilia Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है — हीमोफीलिया और अन्य रक्तस्राव विकारों (Bleeding Disorders) को लेकर जागरूकता फैलाना और रोगियों को बेहतर जीवन देने की दिशा में कार्य करना।
यह दिन फ्रैंक श्नाबेल के जन्मदिवस पर मनाया जाता है, जो वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया (WFH) के संस्थापक थे।
हीमोफीलिया क्या है? जानिए इस बीमारी के पीछे की सच्चाई
हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रक्तस्राव विकार है, जिसमें शरीर में रक्त जमने (clotting) की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इस वजह से चोट लगने पर रक्त बहना रुकता नहीं है और गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यह रोग अक्सर पुरुषों में पाया जाता है और इसकी कोई स्थायी इलाज नहीं है — लेकिन समय पर इलाज से जीवन सामान्य हो सकता है।

World Haemophilia Day 2025 Theme:
“Access for All: Women and Girls Bleed Too”
इस वर्ष, 2025, विश्व हीमोफीलिया दिवस की सभी के लिए पहुँच: महिलाओं और लड़कियों को भी रक्तस्राव होता है. यह थीम रक्तस्राव विकारों से पीड़ित लड़कियों और महिलाओं के लिए बेहतर निदान और उपचार की आवश्यकता पर जोर देती है, जिन्हें अक्सर कम निदान और कम सुविधाएँ दी जाती हैं.
भारत में हीमोफीलिया की स्थिति
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भारत में लगभग 1.36 लाख अनुमानित हीमोफीलिया मरीज हैं, लेकिन पंजीकृत मरीजों की संख्या बहुत कम है।
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ग्रामीण इलाकों में तो लोगों को अभी तक इस बीमारी की पहचान भी नहीं हो पाई है।
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इलाज महंगा और सुविधाएं सीमित हैं — खासकर छोटे शहरों और कस्बों में








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