Monday, 10 April 2017

"सफल और विफल” दोनों के लिए–शुभरा सिंह (यूको बैंक पीओ)-33

Hey,
Bankers Adda Success Story 

इस खुबसूरत पल पर मैं आपके साथ अपनी कविता की कुछ पंक्तियाँ शेयर करना चाहती हूँ.


Sunken eyes and a dull face,
no smile, not even it's trace.
Hurting legs and a staggering walk,
but head held high for I had to walk the talk.
Rotten lungs and a bruised heart,
there ain't no hair, but to hide is scarf.
This was I a few months back,
when I was hurt, when I had ache.

यह एक इंजीनियरिंग में स्नातक, एक पर्यावरण उत्साही, एक नौसिखिया लेखक और एक एमडीआर टीबी जैसी भयानक बीमारी से उभरी हुई एक लड़की की कहानी है, मेरा जीवन आश्चर्यों से भरा हुआ हैं चूकिं जब मैं Accenture कंपनी में एक एसोसिएट सॉफ्टवेयर इंजिनियर के रूप में काम कर रही थी उस समय मुझे ये बीमारी एक अप्रत्याशित आश्चर्य के रूप में प्राप्त हुई जो मेरे जीवन के सभी सुखदायक पहलुओं को बदल दिया. जो मैंने कभी सोची भी नही, वो मुझे प्राप्त हुआ. बेंगलुरु शहर के कॉर्पोरेट जीवन में मेरे लगभग अच्छे दिन गुजर रहे थें लेकिन अचानक एमडीआर टीबी बीमारी के कारण मुझे कॉर्पोरेट जीवन छोड़ कर एक अस्पताल में जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य होना पड़ा और अंततः मुझे वह शहर छोड़ कर अपने घर कानपुर आना पड़ा.
लगभग 6 महीनों तक पूरी तरह से बिस्तर पर लेटे रहने के बाद मै ठीक हुई और उसके बाद हर दिन मुझे अपने काम-काज के साथ संघर्ष करते हुए तथा प्रति दिन 20 से अधिक गोलियां और 200 से अधिक इंजेक्शन लेते हुए अपने अध्ययन को बनाए रखना काफी कठिन था लेकिन मैंने हार नही मानी और अपने अध्ययन को जारी रखा और मेरी मेहनत, दृढ़ इच्छा और लगन के कारण मैं उठने में कामयाब रही, यह मेरे जीवन का एक अत्यंत दर्दनाक और निराशाजनक चरण था. मै हर सुबह दिल में एक आशा, मेरी आँखों के सामने एक लक्ष्य और एक उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर के साथ अपने नींद से जगती थी, जो केवल मैं ही अपने स्वयं के लिए निर्माण कर सकती थी.
मैं प्रत्येक दिन अपनी ताकत बढ़ाने में सफल रही, मैंने न केवल अपने लक्ष्य के लिए प्रयास किया, बल्कि एक पूरे वर्ष तक सभी बाधाओं जो उतार-चढ़ाव,अच्छें–बुरें आदि, उपलब्धियों और निराशाओं से भरा था, के विरुद्ध लड़ती रही. मेरे नानाजी मुझे एक कथन कहा करते थे वह कथन यह है  कि "जीवन में विषम पंथ पर चलता जा, उठ संघर्षों से लड़ता जा" और मैंने इस कथन को अपने दिल में बांध लिया और फिर कभी मैंने उस समय को कभी भी नहीं देखा जब मैं हार गई थी और ये सब कुछ मेरे अद्भुत और अनोखे परिवार की वजह से हो रहा था, जिसने मुझे हर कदम पर सहयोग, प्रेरणा और साहस दिया, इसके अलावा कुछ अच्छे दोस्त और शिक्षक ऐसे थे जिन्होंने हमेशा मुझे प्रेरित और मार्गदर्शन किया, जिससे मुझे परीक्षा पास करने में बहुत मदद मिली. यह सफलता मुझे बहुत सारे लोगों की वजह से और उनकी मेरे लिए प्रार्थना की वजह से मिली है. मैं आईबीपीएस पीओ को पास करने में सक्षम बनी और आज मैं यूको बैंक में पीओ हूं. मैं आप से बस यही कहना चाहती हूं, कि सिर्फ अपने जूनून को बनाये रखे, अधिक से अधिक प्रायस करें और कभी भी हार न माने , क्योंकि यदि मैं कर सकती हूँ तो आप भी कर सकते हैं..............


धन्यवाद
नाम: शुभरा सिंह

चयनितः यूको बैंक पीओ

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