स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देने वाले प्रधानमंत्री: अब तक 14 नेता, 1947 से जारी है परंपरा
भारत में 15 अगस्त का दिन सिर्फ तिरंगा फहराने और परेड का ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के लाल किले से राष्ट्र को संबोधन का भी प्रतीक है। यह परंपरा 15 अगस्त 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक “ट्रिस्ट विद डेस्टिनी” भाषण से शुरू हुई थी और अब तक 14 प्रधानमंत्रियों ने यह सम्मानजनक जिम्मेदारी निभाई है।
परंपरा की शुरुआत – पंडित नेहरू का ऐतिहासिक भाषण
स्वतंत्रता की पहली सुबह, 15 अगस्त 1947 को, पंडित नेहरू ने लाल किले से जोश से भरा भाषण दिया। इसमें उन्होंने आज़ादी, एकता और नए भारत के निर्माण का सपना पेश किया। यह क्षण इतना ऐतिहासिक था कि इसके बाद हर साल प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संबोधन एक राष्ट्रीय परंपरा बन गया।
अब तक 14 प्रधानमंत्री दे चुके हैं भाषण
1947 से लेकर 2024 तक, कुल 14 प्रधानमंत्रियों ने इस अवसर पर भाषण दिया है। हर भाषण में देश की प्रगति, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर बात की गई है। यह सिर्फ एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि देश की दिशा और दृष्टि तय करने का मौका होता है।
स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देने वाले प्रधानमंत्री – सूची
| प्रधानमंत्री का नाम | प्रमुख वर्ष |
|---|---|
| पं. जवाहरलाल नेहरू | 1949, 1956, 1960–1963 |
| लाल बहादुर शास्त्री | 1964–1965 |
| इंदिरा गांधी | 1966–1975, 1980–1984 |
| मोरारजी देसाई | 1977–1978 |
| चरण सिंह | 1979 |
| राजीव गांधी | 1985–1989 |
| विश्वनाथ प्रताप सिंह | 1990 |
| पी. वी. नरसिम्हा राव | 1991–1995 |
| एच. डी. देवेगौड़ा | 1996 |
| आई. के. गुजराल | 1997 |
| अटल बिहारी वाजपेयी | 1998, 2000–2003 |
| मनमोहन सिंह | 2004–2013 (डेटा विस्तार में जोड़ा जा सकता है) |
| नरेंद्र मोदी | 2014–2024 |
प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण का महत्व
- यह भाषण देश की वर्तमान स्थिति का आकलन प्रस्तुत करता है।
- सरकार की भविष्य की योजनाओं की झलक देता है।
- नागरिकों में एकता और देशभक्ति की भावना बढ़ाता है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की नीतिगत दिशा को दर्शाता है।
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