NSA - जानिए क्या हैं National Security Act? राष्ट्रीय सुरक्षा कानून किस पर और क्यों लगाया जाता?

NSA - जानिए क्या हैं National Security Act? राष्ट्रीय सुरक्षा कानून किस पर और क्यों लगाया जाता?


What is National Security Act -

इस समय चर्चा में क्यों है?

हाल ही में इस कानून का प्रयोग उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किया. जिसके बाद से  राष्ट्रीय सुरक्षा कानून(NSA) चर्चा में आया. इस समय देश Coronavirus जैसी महामारी से लड़ रहा है इस लड़ाई में सबसे पहली पंक्ति में खड़े है डॉक्टर और पुलिस. पर बीते कुछ दिनों में कुछ ऐसे मामले सामने आये जहाँ पुलिस और मेडिकल टीम पर हमला किया गया. बिना  जान की परवाह किये COVID 19 के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले कोरोना वॉरियर्स के साथ हुई बदसलूकी की वजह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह सख्त फैसला लिया हैं. yogi adityanath ने साफ़ कर दिया है कि ऐसे लोगों के खिलाफ़ सख्त कार्यवाही की जाएगी. अब आपके अन्दर यह सवाल उठ रहा होगा कि क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और इसका प्रयोग कब, कैसे व क्यों किया जाता है? तो चलिए विस्तार से जानते हैं कि क्या हैं राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA ?



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क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)


जैसे कि आप नाम से ही समझ सकते हैं कि यह देश की सुरक्षा से सम्बंधित हैं. इस कानून के माध्यम से उन पर लगाम लगाईं जाती है जो देश की सुरक्षा के आड़े आते हैं अर्थात ऐसे लोग जो देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं. उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के लिए यह कानून प्रयोग में आता है. अगर ऐसा लगता है कि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में बाधा बना हुआ है ऐसे में NSA के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है. इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने हिरासत में रखा जा सकता है अगर सरकार को मामले से संबंधित नए सबूत मिलते हैं तो समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है. कुल मिला कर इस  कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना न्यायिक प्रक्रियाओं से गुज़रे सीधे ही गिरफ्तार किया जा सकता है.


राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम कब अस्तित्व में आया -

वैसे तो भारत में यह कानून प्रभावी रूप से इंदिरा गांधी की सरकार के कार्यकाल में 23 सितंबर, 1980 को आया. लेकिन अगर इसकी पृष्ठभूमि (background) देखें तो भारत में सबसे पहले बंगाल विनियमन- III, 1818 के दौरान एक ऐसा ही कानून लाया गया था जो निवारक निरोध कानून था. इसके बाद 1919 में रोलेट एक्ट(Rowlatt Acts) अंग्रेजी सरकार लेकर आई, जिसके तहत संदिग्घ लोगों को सीधे गिरफ्तार करने की अनुमति दी गई. आजाद भारत में निवारक निरोधक अधिनियम (Preventive Detention Act- PDA) 1950 में आया जिसे 31 दिसंबर, 1969 को लागू किया गया. इसके बाद आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (Maintenance of Internal Security Act-  MISA) सन 1971 में लागू हुआ, पर जनता पार्टी के कार्यकाल के दौरान 1977 में इस कानून को निरस्त कर दिया गया. इसके बाद 1980 में एक बार फिर से इस कानून को कांग्रेस सरकार ने लागू कर दिया.

राज्य क्यों लागू करते हैं राष्ट्रीय सुरक्षा कानून?

संविधान के अनुच्छेद 22 (1) में कहा गया है कि एक गिरफ्तार व्यक्ति को परामर्श या बचाव के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है.आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code- Cr.PC) की धारा 50 के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है तो गिरफ्तारी के आधार तथा जमानत के अधिकार के बारे में सूचित किया जाना चाहिये. इसके साथ ही Cr. PC की धारा 56 तथा  76 के अनुसार गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर एक व्यक्ति को अदालत में पेश करना जरुरी है. साथ ही ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ (National Crime Records Bureau- NCRB) NSA के तहत आने वाले किसी भी मामले को अपने आँकड़ों में शामिल नहीं करता है क्योंकि NSA मामलों में कोई FIR दर्ज नहीं की जाती है. उपरोक्त अधिकार NSA कानून के अंतर्गत आने वाले लोगों को नहीं मिलते हैं, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से इसका प्रयोग किया जाता है.  
  • राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को प्रभावी ढंग से बनाए रखने के लिए लागू किया जाता है.
  • यह अधिनियम सरकारी अधिकारियों को विदेशियों को हिरासत में लेने और उन्हें भारत से निष्कासित करने का अधिकार देता है.
  • अगर किसी को सुरक्षा की दृष्टि से या अन्य देशों के साथ भारत के संबंधों के लिए खतरनाक पाया जाता हैं तो उसे NSA के तहत किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है.
  • केंद्र या राज्य सरकार रासुका के तहत किसी भी व्यक्ति को महीनों तक हिरासत में रख सकती है, जब वे उन्हें राष्ट्र की सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक पाती हैं. 

हमें उम्मीद है कि आपको NSA सम्बंधित सभी प्रश्नों के  जवाब मिल गए होंगे. किसी भी तरह कि प्रतियोगी परीक्षा से सम्बंधित मदद प्राप्त करने के लिए आप adda247 के साथ जुड़े रहें.