आज देश में चारों ओर नागरिकता (Citizenship) का मुद्दा छाया हुआ. नागरिकता जो कि देश की आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) से जुड़ा बेहद ही संवेदनशील विषय हैं. पिछले कुछ समय से लगभग हर अख़बार, न्यूज चैनल में इस विषय की गूंज सुनाई पड़ती हैं, और जो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी काफी चर्चा का विषय बना हुआ हैं. ADDA247 भी अपने रीडरों के लिए इससे जुडी कुछ महतवपूर्ण जानकारी लेकर आया हैं.
क्या है? राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (national register of citizen -NRC Bill)
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (national register of citizen -NRC Bill) एक रजिस्टर है जिसमें भारत में रह रहे सभी वैध नागरिकों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
- 1985 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने असम गण परिषद (Assam Gan Parishad) से समझौता किया जिसके तहत 25 मार्च 1971 के पहले जो बांग्लादेशी असम में आए हैं केवल उन्हें ही नागरिकता दी जाएगी। लेकिन लंबे वक्त तक इसे ठंडे बस्ते में रखा गया। फिर 2005 में सरकार ने इस पर काम शुरू किया।
- 2015 में उच्चतम न्यायालय (SUPREME COURT) के आदेश के बाद इस काम में तेज़ी आई और एनआरसी को तैयार किया गया। यानी मूल रूप से एनआरसी को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से असम के लिए लागू किया गया है।
- फिलहाल NRC असम के अलावा किसी अन्य राज्य में लागू नहीं है।
क्यों हैं चर्चा में
- अगस्त 2019 में एनआरसी की सूची प्रकाशित की गई, लेकिन क़रीब 19 लाख लोगों के पास उचित दस्तावेज़ नहीं पाए जाने की वजह से उन्हें प्रकाशित रजिस्टर से बाहर रखा गया। इस सूची से बाहर लोगो को वैध प्रमाण पत्र के साथ अपनी नागरिकता साबित करने के लिए वक्त दिया गया।
- अगले संसद सत्र में इसे पूरे देश में लागू करने का बिल लाया जा सकता है। पूरे भारत में लागू करने के लिए इसके लिए अलग जरूरतें और मसौदा होगा।
- एनआरसी के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत
- भारत का वैध नागरिक साबित होने के लिए एक व्यक्ति के पास रिफ्यूजी पंजीकरण (refugee registration), आधार कार्ड, जन्म प्रमाण-पत्र ( birth certificate), जीवन बीमा (LIC Policy), नागरिकता का प्रमाण-पत्र (Citizenship Certificate), पासपोर्ट (Passport), सरकार के द्वारा जारी किया लाइसेंस या सर्टिफिकेट (Goverment Issue Identity or Certificate) में से कोई एक होना चाहिए।
एनआरसी सूची में नहीं होने वाले लोगों का क्या होगा?
- अगर कोई व्यक्ति एनआरसी में शामिल नहीं होता है तो उसे डिटेंशन सेंटर (Detention Centre) में ले जाया जाएगा जैसा कि असम में किया गया है।
- इसके बाद सरकार उन देशों से संपर्क करेगी जहां के वो नागरिक हैं। अगर सरकार द्वारा उपलब्ध कराए साक्ष्यों को दूसरे देशों की सरकार मान लेती है तो ऐसे अवैध प्रवासियों को वापस उनके देश भेज दिया जाएगा।
क्या होगा आगे?
- एनआरसी लिस्ट अभी केवल असम में तैयार की गई है। पूरे देश में जिस एनआरसी को लागू करने की बात की जा रही है, सरकार ने उस दिशा में फ़िलहाल कुछ भी तय नहीं किया हैं। इसलिए सरकार को एनआरसी के प्रावधान तय करने और इसे लागू करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पडे़गी। क्योंकि ये विधेयक संसद से पारित होना हैं इसलिए एनआरसी मसौदे को तैयार कर सरकार को संसद के दोनों सदनों के सामने रखना होगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही एनआरसी अस्तित्व में आ पाएगा।
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