Monday, 31 July 2017

भारत-चीन गतिरोध


भारत, चीन के बीच डोकलाम पठार में हालिया गतिरोध जो भारत, चीन और भूटान के बीच त्रि-जंक्शन पर स्थित है, ने इन दिनों काफी ध्यान आकर्षित किया है. यह इस वर्ष दो सेनाओं के बीच सबसे बड़ा गतिरोध है . ऐसे कई लोग हैं जो युद्ध से डरते हैं. दोनों देशों के बीच जॉनसन लाइन और मैकडॉनल्ड्स लाइन पर भी गतिरोध है, जो दोनों के देशो को विभाजित करती है.


जॉनसन लाइन वह लाइन है, जहां भारत विभाजन को स्वीकार करता है. जिसमे अक्साई चीन को भारतीय क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है. भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों की घुसपैठ और भारतीय सैनिकों कीचीनी क्षेत्र में घुसपैठ की कई घटनाएं सामने आई है. डोकलाम (डॉकलाम) पर चीन का आक्रामक रुख और बदले में भारत की मजबूत चेतावनी, भारत-चीन संबंधों को खराब करने वाला नवीनतम विषय बन गया है. 

लेकिन यहां उल्लेखनीय बात यह है कि चीन की आक्रामकता पर भारत का रुख साफ़ है. यह साबित करता है कि भारत एक शक्तिशाली और आक्रामक पड़ोसी के सामने झुकने को तैयार नहीं है. हाल के वर्षों में, हमने देखा है कि भारत ने रक्षात्मक तरीके से इन चुनौतियों का सामना करने के अपने पुराने तरीको को बदल दिया है. यदि हम इस दृष्टिकोण को हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन से जोड़ कर देखे तो हमें यह पता चलता है कि जब हम अपनी कमजोरियों पर अपनी जिंदगी पर नियंत्रण नहीं करते हैं, तो हम जीवन के युद्ध में खुद को हमेशा कमजोर पाते है.

यदि आप जीवन की कठिन परिस्थितियों में फंस जाते हैं तो आपको हमेशा पीछे हटना पढता है. आपको जीवन में विपत्तियों के खिलाफ कड़े रुख की आवश्यकता है. यदि आप उनका वीरता के साथ सामना करते हैं तो वे आपके सामने छोटी लगने लगती है. जैसे-जैसे आप अपने हाथों में चार्ज लेते हैं, वैसे ही दुर्बलता कम हो जाती हैं और आप पूरी ताकत के साथ अपनी समस्याओ को हराने लगते है. ये परीक्षाएं चीन जैसे कठिन समस्याओं की तरह हैं और आपको इनके प्रति भारत जैसा कड़ा रुख अपनाने की जरुरत है. यदि हम 1962 की बात करें तो हमने अपने पडोसी द्वारा करारी शिकस्त प्राप्त की थी.

उस समय हम बहुत कमजोर थे और ड्रैगन का कठिन प्रतिरोध नहीं कर पायें थे. लेकिन अब परिस्थियाँ बदल चुकी है. और ये सब सिर्फ इन वर्षो में कठिन परिश्रम का नतीजा है. भारत ने इस सम्मान और विश्वसनीयता को अर्जित किया है. तो, आप लोगों को भी इस तरह काम करने की ज़रूरत है अगर आप जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं. हां, यह सच है कि इसके लिए अपने आपको मेहनत की आंच में तपाने की ज़रूरत है, लेकिन यदि आपको लक्ष्य तक पहुंचा है तो यह तो करना ही होगा. किसी भी परीक्षा में असफलता आपकी योग्यता सिद्ध नहीं करती. अपने देश की तरह फिर से खड़े हो जाओ और इस बार डट कर खड़े हो और जीतने के लिए खड़े हो.  

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