पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, भू-राजनीतिक तनाव और पूंजी प्रवाह में बदलाव के कारण USD/INR विनिमय दर में अस्थिरता बढ़ी है। साथ ही, भारतीय कॉरपोरेट्स और वित्तीय संस्थानों ने अधिक परिष्कृत हेजिंग उपकरणों की मांग की है।
अब तक भारतीय बैंक कई नियामकीय प्रतिबंधों के कारण लंदन या सिंगापुर जैसे वित्तीय केंद्रों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे थे। नए सुधारों का उद्देश्य भारतीय बैंकों को वैश्विक समकक्षों के बराबर अवसर देना है, जबकि नियामकीय निगरानी मजबूत बनी रहे।
RBI Issues Draft Guidelines on Forex Dealings: क्या बदलने वाला है?
Reserve Bank of India (RBI) ने 17 फरवरी 2026 को ‘Foreign Exchange Dealings of Authorised Persons’ पर ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। यह हाल के वर्षों में भारत के विदेशी मुद्रा नियमों में सबसे बड़ा उदारीकरण माना जा रहा है।
ये बदलाव 10 मार्च 2026 तक हितधारकों के सुझावों के लिए खुले हैं और अप्रैल 2026 तक अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने की संभावना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
- USD/INR में बढ़ती अस्थिरता
- वैश्विक मौद्रिक नीतियों में बदलाव
- भारतीय कंपनियों की उन्नत हेजिंग इंस्ट्रूमेंट्स की मांग
- लंदन जैसे ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स से प्रतिस्पर्धा
- अब भारतीय बैंक और प्राइमरी डीलर्स को वैश्विक बैंकों जैसा ऑपरेशनल लचीलापन मिलेगा।
प्रमुख नियामक बदलाव
1. हेजिंग और मार्केट-मेकिंग में विस्तार
| पहलू | नया प्रावधान | उद्देश्य |
| इंटर-डीलर ट्रांजैक्शन | अधिकृत डीलर्स के बीच फॉरेक्स ट्रांजैक्शन की अनुमति | बेहतर जोखिम प्रबंधन |
| विदेशी मुद्रा ऋण | प्रत्यक्ष ऋण और लेंडिंग की अनुमति | तरलता प्रबंधन |
| ओवरसीज उधारी सीमा | Tier-I कैपिटल का 100% या USD 10 मिलियन | फंडिंग विकल्प बढ़ाना |
नोटः अब बैंकों को हर ट्रांजैक्शन के लिए अलग अनुमति की जरूरत नहीं होगी।
2. Non-Deliverable Derivative Contracts (NDDCs)
- रुपये से जुड़े NDDC की अनुमति
- कैश सेटलमेंट (रुपये या विदेशी मुद्रा में)
- IFSC बैंकिंग यूनिट होना जरूरी
यह सुधार भारतीय बाजार को वैश्विक वित्तीय केंद्रों के बराबर लाता है।
रणनीतिक महत्व:
इससे बाजार प्रतिभागी बिना वास्तविक डिलीवरी के रुपये की एक्सपोजर को हेज कर सकेंगे। इससे सेटलमेंट जोखिम और परिचालन जटिलता कम होगी।
3. इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (ETP) का विस्तार
- घरेलू प्लेटफॉर्म: RBI-अधिकृत ETP पर फॉरेक्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव की अनुमति।
- विदेशी प्लेटफॉर्म: FATF सदस्य देश में रजिस्टर्ड; IOSCO या CPMI द्वारा विनियमित
महत्व:
यह कदम डिजिटल ट्रेडिंग को बढ़ावा देगा और वैश्विक मानकों के अनुरूप बाजार संरचना तैयार करेगा।
4. ट्रेजरी और विदेशी मुद्रा निवेश में लचीलापन
अब बैंक अधिशेष विदेशी मुद्रा को निम्नलिखित में निवेश कर सकते हैं:
- ओवरनाइट प्लेसमेंट
- रिवर्स रेपो
- मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स
- सॉवरेन डेट
विशेष प्रावधान: FCNR(B) डिपॉजिट के लिए लंबी अवधि के विदेशी सॉवरेन बॉन्ड में निवेश की अनुमति।
लाभ: बैंकों की तरलता प्रबंधन क्षमता मजबूत होगी।
5. गोल्ड हेजिंग प्रावधान
Gold Monetisation Scheme, 2015 के तहत नामित बैंकों को:
- विदेशी बाजारों में एक्सचेंज-ट्रेडेड प्रोडक्ट्स
- OTC हेजिंग उत्पादों का उपयोग
RBI की शर्त: ऑप्शन-आधारित उत्पादों में नेट प्रीमियम प्राप्त नहीं होना चाहिए, ताकि सट्टेबाजी को रोका जा सके।
6. रिपोर्टिंग प्रक्रिया में सरलता
- Net Open Position (NOP) लिमिट की रिपोर्टिंग फॉर्मेट को अपडेट किया गया है।
- उद्देश्य: अनुपालन बोझ कम करना और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना।
7. विस्तारित मार्केट ऑवर्स
अब अधिकृत डीलर्स घरेलू समय के बाहर भी ग्राहकों, अन्य डीलर्स, IFSC यूनिट्स के साथ लेन-देन कर सकेंगे।
प्रभाव:
भारतीय बाजार 24×7 वैश्विक घटनाओं पर प्रतिक्रिया दे सकेगा।
जोखिम और नियामक संबंधी संतुलन
| जोखिम | RBI की रणनीति |
|---|---|
| लीवरेज जोखिम | पूंजी पर्याप्तता नियम |
| परिचालन जोखिम | चरणबद्ध क्रियान्वयन |
| काउंटरपार्टी जोखिम | FATF और रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म अनिवार्य |
| बाजार जोखिम | आंतरिक गवर्नेंस और बोर्ड निगरानी |
नोटः RBI ने स्पष्ट किया है कि उदारीकरण के साथ निगरानी भी मजबूत रहेगी।
फंक्शनिंग टाइमलाइन
- 17 फरवरी 2026 – ड्राफ्ट जारी
- 10 मार्च 2026 – फीडबैक की अंतिम तिथि
- अप्रैल 2026 – अंतिम गाइडलाइंस संभावित
- Q2 2026 – लागू होने की संभावना
बाजार पर संभावित प्रभाव
बैंकों के लिए:
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बराबरी
- राजस्व के नए अवसर
- जोखिम प्रबंधन में निवेश की जरूरत
कॉरपोरेट्स के लिए:
- बेहतर हेजिंग विकल्प
- लागत में कमी
- 24 घंटे बाजार सुविधा
वित्तीय बाजार के लिए:
- तरलता में वृद्धि
- गहरा बाजार ढांचा
- वैश्विक एकीकरण में तेजी


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