सफलता की कहानी: असफलताओं से सफलता तक
सफलता कभी भी अचानक नहीं आती। रिशभ भारती की यात्रा इस बात का जीवंत उदाहरण है। दो साल तक उन्होंने बैंकिंग एग्ज़ाम पास करने के अपने लक्ष्य पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित रखा, भले ही उन्हें बार-बार असफलताओं का सामना करना पड़ा।
पिछले वर्ष के परिणाम उनके पक्ष में नहीं गए थे। यह निराशा किसी भी सामान्य व्यक्ति को हार मानने पर मजबूर कर सकती थी। लेकिन रिशभ ने हार मानने की बजाय अपनी तैयारी रणनीति का विश्लेषण किया और यह पता लगाया कि कहां उनकी कमजोरी थी। यही मोड़ उनके करियर में निर्णायक साबित हुआ।
असफलताओं से मेंस परीक्षा में सफलता तक
रिशभ का कहना है कि मेंस परीक्षा हमेशा उनके लिए “अटूट” महसूस होती थी। प्रीलिम्स में तो वे सफलता पा सकते थे, लेकिन मेंस की जटिलता ने उनकी कमजोरियों को उजागर किया।
उन्होंने महसूस किया कि केवल कड़ी मेहनत करना पर्याप्त नहीं था। उन्हें स्मार्ट अध्ययन और स्ट्रक्चर्ड गाइडेंस की आवश्यकता थी।
इस साल उन्होंने अपने शिक्षकों द्वारा सुझाई गई योजना को पूरी तरह अपनाया और अनियमित अध्ययन को छोड़ दिया।
- कन्सिस्टेंसी
- डिसिप्लिन
- क्लैरिटी
इन तीनों ने भ्रम और आत्म-संदेह को खत्म कर दिया।
असफलताओं से सीख
रिशभ ने असफलताओं को शिक्षक के रूप में अपनाया। उन्होंने परिस्थितियों को दोषी नहीं ठहराया, बल्कि अपनी गलतियों का विश्लेषण किया।
- केवल प्रीलिम्स पास करना पर्याप्त नहीं था; मेंस की तैयारी कमजोर थी।
- एडवांस टॉपिक्स में कॉन्सेप्चुअल क्लैरिटी जरूरी थी।
- मॉक टेस्ट का विश्लेषण करना सिर्फ टेस्ट देने से ज्यादा महत्वपूर्ण था।
- विभिन्न स्रोतों के बीच भागना छोड़ दिया और फोकस्ड स्ट्रेटेजी अपनाई।
- सिर्फ सेल्फ-स्टडी पर भरोसा छोड़कर गाइडेड मेंटरशिप को अपनाया।
परिणाम: उनकी तैयारी की नींव मजबूत हो गई।
टर्निंग पॉइंट: स्ट्रक्चर्ड मेंस तैयारी
रिशभ बताते हैं कि असली बदलाव तब आया जब उन्होंने Adda247 के Rankers Mains Batch में नामांकन कराया।
- उन्होंने जाना कि कहां मार्क्स गंवाए जा रहे हैं – रीजनिंग और क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड में।
- उत्तर चयन और टाइम मैनेजमेंट में सुधार किया।
- लंबे और जटिल मेंस-लेवल पजल्स हल करना सीखा।
- डिस्क्रिप्टिव और कॉन्सेप्ट-बेस्ड प्रश्नों का अभ्यास किया।
- मॉक टेस्ट का हर बार डीप एनालिसिस किया, केवल स्कोर पर ध्यान नहीं दिया।
- धीरे-धीरे “अटूट” मेंस परीक्षा मैनेजबल बन गई।
शिक्षकों की गाइडेंस का महत्व
रिशभ के अनुसार सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने शिक्षकों के निर्देशों का पालन करना शुरू किया।
- हर दिन डिसिप्लिन्ड स्टडी रूटीन बनाए रखा।
- कठिन विषयों को टालने की बजाय नियमित रूप से रिवीजन किया।
- कमजोर क्षेत्रों पर फोकस किया और मजबूत क्षेत्रों को दोहराने से परहेज़ किया।
- प्रैक्टिस सत्रों में मिले फीडबैक को लागू किया।
- परिणाम तुरंत न दिखने पर भी धैर्य और स्थिरता बनाए रखी।
सीख: सफलता रातोंरात नहीं मिलती
रिशभ की कहानी हमें यह सिखाती है कि:
- असफलताओं को सीखने का अवसर मानें।
- स्मार्ट और स्ट्रक्चर्ड तैयारी से ही बड़े एग्ज़ाम में सफलता मिलती है।
- मेंटरशिप और फोकस्ड रणनीति बेहद जरूरी है।
- कन्सिस्टेंसी, धैर्य और आत्म-विश्वास सफलता की कुंजी हैं।
रिशभ भारती की यात्रा साबित करती है कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती, बल्कि सही रणनीति, अनुशासन और धैर्य के साथ लगातार प्रयास करने पर ही बड़ी उपलब्धियाँ हासिल होती हैं।
अगर आप भी बैंकिंग एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं, तो रिशभ के अनुभव से प्रेरणा लें और स्मार्ट, स्ट्रक्चर्ड और कन्सिस्टेंट तैयारी शुरू करें।





