10/06/2017

कतर तनाव: खाड़ी की शक्तियों द्वारा कतर का पृथक्करण

प्रिय पाठकों,


हाल के दिनों में सऊदी अरब के कतर के साथ संबंधों को तोड़ने के निर्णय के बाद खाड़ी के क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है. यह समाचार और कर्रेंट अफेयर्स में एक आवश्यक विषय है और इसलिए आपका इस तनावपूर्ण विषय के बारे में जानना महत्वपूर्ण है चूंकि इससे संबंधित प्रश्न आगामी NICL AO Mains और RBI ऑफिसर ग्रेड-बी परीक्षाओं में आ सकते है. सऊदी अरब द्वारा कतर को अलग कर दिया गया गया था जिसके बाद खाड़ी के अन्य शक्तिशाली देशों भी इसमें शामिल हो गए. तनाव के विषय में अधिक जानकारी के लिए हमें सबसे पहले कतर की भौगोलिक स्थिति को समझना होगा.

कतर अरब के पूर्व में एक प्रायद्वीप है, जो कि फारस की खाड़ी और सऊदी अरब की सीमा पर है, जो प्रमुख पेट्रोलियम जमा के पास स्थित एक रणनीतिक स्थान है. खाड़ी राष्ट्रों के अनुसार कतर के अलगाव का सबसे महत्वपूर्ण कारण अन्य यह मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे क्षेत्रीय कट्टरपंथी इस्लामवादी समूहों का कथित समर्थन है. इस प्रकार के संगठन कई देशों में आतंकवाद के प्रचार के लिए कुख्यात हैं. दूसरे स्थान पर, शिया-बहुमत वाले ईरान के साथ कतर के सुखद संबंध सुन्नी बहुमत वाले सऊदी अरब को अधिक पसंद नहीं है. लेकिन इस घटना ने तत्काल चिंगारी तब पकड़ी जब कतर आधारित न्यूज एजेंसी वेबसाइट ने ईरान के प्रति शत्रुता के आधार पर अमेरिका की आलोचना की थी. इसने खाड़ी देशों में कतर के खिलाफ पहले से ही भरे गुस्से को प्रज्वलित कर दिया. बहरीन पहला देश था जिसने कार्यवाही शुरू की, और बाद में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मिस्र, यमन, लीबिया की पूर्वी सरकार और मालदीव ने इसका समर्थन किया. इन देशों ने कतार निवासियों और आगंतुकों को दो सप्ताह समय में अपने क्षेत्र को छोड़ने के लिए कहा है. इसके अलावा, उन्होंने कतर के लिए अपने नागरिकों की  यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. 

इस प्रतिबंध का कतर के समृद्ध उद्योगों पर भी कुछ गंभीर प्रभाव पड़ेंगे. यदि हम निर्माण कार्य को चिंता का विषय मानते हैं तो 2022 में आयोजित होने वाले फीफा फुटबॉल विश्व कप के चलते प्रतिबंध से पूर्व यह अपनी पूरी गति में था. अब वह प्रवासी श्रमिक जो कतार की आबादी का 90% हिस्सा हैं, वे बेहद गंभीर दुविधा में हैं. उन्हें अपने भविष्य के विषय में बहुत अनिश्चिताएं हैं. अन्य उद्योग विमानन उद्योग है. यात्रा पर प्रतिबंध लगाने के कारण इसमें कुछ भारी नुकसान होगा.जैसा कि उड़ानों को सामान्य से अधिक लंबा रास्ता लेना होगा, इसके परिणामस्वरूप उड़ान में देरी, अधिक ईंधन की खपत, ग्राहको असंतोष जैसी मुश्किलें सामने होगी. तीसरा उद्योग जो प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा, वह खाद्य उद्योग होगा. 

अब प्रश्न यह उठता है कि आने वाले दिनों में क्या हो सकता है? यह पूरी दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा. इसलिए, दुनिया भर की मीडिया की नजरे कतर के रुख पर गडी होंगी.

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